सोनम वांगचुक की एनएसए हिरासत केंद्र सरकार ने की रद्द

केंद्र सरकार ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को तुरंत प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया है। यह जानकारी गृह मंत्रालय ने शनिवार को दी। मंत्रालय ने बताया कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए लिया गया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला लद्दाख में शांति और स्थिरता का माहौल बनाने के लिए लिया गया है।

वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। इससे ठीक दो दिन पहले लेह में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर बड़े प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए थे।

मंत्रालय ने कहा, “सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक और सार्थक संवाद संभव हो सके। इस उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए और उचित विचार-विमर्श के बाद, सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत उपलब्ध शक्तियों का प्रयोग करते हुए सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया है।”

केंद्र ने वांगचुक पर नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों में हुए विरोध प्रदर्शनों का हवाला देकर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था। हिरासत के बाद उन्हें राजस्थान के जोधपुर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था।

उनकी हिरासत करीब पांच महीने तक चली। इस दौरान उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उनकी रिहाई की मांग की थी। केंद्र ने अदालत में दावा किया था कि वांगचुक की सेहत संबंधी शिकायतें “बनावटी और दिखावटी” हैं। जेल में उनके 24 बार मेडिकल जांच हुई, जिसमें उन्हें “फिट, स्वस्थ और मजबूत” बताया गया। फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने स्वास्थ्य आधार पर रिहाई से इनकार किया था।

26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख तय की थी। इसके बाद कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया था कि क्या उनके भाषण और सोशल मीडिया पोस्ट को वास्तव में भड़काऊ माना जा सकता है और क्या उनका 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा से कोई सीधा संबंध है।

रिहाई की घोषणा के दो दिन पहले 12 मार्च 2026 को सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया के माध्यम से संदेश दिया था कि वे सक्रियता से पीछे नहीं हटे हैं, लेकिन इसमें “स्पष्टता, एकता और सच्चे संवाद” की जरूरत है। उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने कहा कि रिहाई के बाद वे आंदोलन के रास्ते पर नहीं चलेंगे, बल्कि लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांग को चर्चा और संवाद के माध्यम से आगे बढ़ाएंगे।

यह फैसला लद्दाख में हितधारकों के साथ सरकार की जारी बातचीत के बीच आया है, जहां क्षेत्रीय आकांक्षाओं और चिंताओं को दूर करने पर जोर दिया जा रहा है। सोनम वांगचुक को लद्दाख का “परिवर्तन का इंजीनियर” कहा जाता है, जो शिक्षा, पर्यावरण और क्षेत्रीय अधिकारों के लिए लगातार काम करते रहे हैं।

उनकी रिहाई से लद्दाख में संवाद की नई उम्मीद जगी है, और कार्यकर्ता अब आंदोलन को शांतिपूर्ण चर्चा की ओर मोड़ने की बात कर रहे हैं।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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